Electric Car से जुड़ी ये अहम बातें जानते हैं आप? जानें फायदे और नुकसान

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इलेक्ट्रिक फोर व्हीलर को चलाने की लागत औसतन 1 से डेढ़ रुपये के बीच आती है। यानी की 50 किलो मीटर चलने पर 50 से 70 रुपये का खर्च। वहीं पेट्रोल वाहन में यह खर्च औसतन 250 से 350 रुपये के बीच होता है।

इलेक्ट्रिक व्हीक्ल की डिमांड में बीते कुछ साल में तेजी देखने को मिली है। दुनिया के कई देश इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ चुके हैं। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। यही वजह है कि कार निर्माता कंपनियां भी अब इस सेगमेंट की कारों पर फोकस कर रही हैं।

इलेक्ट्रिक व्हीक्ल की रनिंग कॉस्ट यानी इन्हें चलाने का खर्च पेट्रोल डीजल के मुकाबले सस्ता माना जाता है। यानी की ग्राहक को महंगे फ्यूल से छुटकारा मिल जाता है। पेट्रोल डीजल भरवाने के लिए आपको बार-बार पेट्रोल पंप पर जाने की जरूरत नहीं होती।

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इलेक्ट्रिक व्हीक्ल में रिचार्जेबल बैटरी लगी होती है। ऐसे में बैटरी चार्ज करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीक्ल बेचने वाली कंपनियां ग्राहक के घर पर चार्जिंग यूनिट इंस्टाल करती हैं।

घर पर लगे चार्जिंग यूनिट से वाहन को चार्ज करने में 8-10 घंटे का समय लग जाता है। वहीं ग्राहक अगर चार्जिंग स्टेशन से बैटरी चार्ज करवाएं तो औसतन 1 से डेढ़ घंटे का समय लग जाता है। समान्य तौर पर इलेक्ट्रिक फोर व्हीक्ल को हर 90-100 किलो मीटर पर चार्ज करने की जरूरत पड़ती है।

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इलेक्ट्रिक कार से प्रदूषण भी नहीं होता। ऐसा इसलिए क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल और डीजल वाहनों के मुकाबले काफी कम उत्सर्जन पैदा करते हैं। हालांकि इलेक्ट्रिक फोर व्हीक्ल पेट्रोल और डीजल वाहन की तुलना में ज्यादा महंगे होते हैं। देश में चार्जिंग स्टेशनों की कमी भी है जिसके चलते इस सेगमेंट की कारों को खरीदने में लोग कतराते हैं। पर्याप्त संख्या में चार्जिंग स्टेशन्स न होना इलेक्ट्रिक व्हीक्ल की बिक्री में बड़ी बाधा माना जाता है।

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